हरिद्वार, (आदेश त्यागी) : अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के भीतर चल रही आपसी खींचतान और गुटबाजी का असर अब आगामी मेले की तैयारियों पर भी दिखने लगा है। बुधवार को मेला अधिष्ठान द्वारा आयोजित महत्वपूर्ण बैठक अखाड़ों के बीच समन्वय और संवाद की कमी के चलते “बेनूर” साबित हुई। परिषद के 13 में से 8 अखाड़ों ने बैठक से दूरी बनाए रखी, जिससे आयोजन स्थल पर कुर्सियां खाली नजर आईं।

आमंत्रण की ‘चूक’ पड़ी भारी

​हाल ही में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आमंत्रण पर सभी अखाड़ों ने एक साथ आकर सहयोग का आशीर्वाद दिया था। उस समय मेला अधिष्ठान ने सभी अखाड़ों को व्यक्तिगत निमंत्रण भेजा था। लेकिन इस बार अखाड़ा परिषद के दो गुटों में बंटे होने के कारण, निमंत्रण भेजने की प्रक्रिया में हुई प्रशासनिक चूक भारी पड़ गई। नाराज 8 अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने बैठक का पूरी तरह बहिष्कार कर दिया।

बैठक में उपस्थिति और कोरम का अभाव

​बुधवार को हुई इस बैठक में केवल निरंजनी, जूना, आवाहन, अग्नि और आनंद अखाड़े के प्रतिनिधियों ने ही शिरकत की। परिषद के एक गुट के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी महाराज और महामंत्री महंत हरि जी महाराज की मौजूदगी में मेला अधिकारी सोनिका सिंह व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने व्यवस्थाओं पर चर्चा तो की, लेकिन संतों की भारी अनुपस्थिति के कारण बैठक का उद्देश्य सफल होता नहीं दिखा।

  • गुटबाजी का साया: आपसी समन्वय की कमी से अखाड़ों में दो फाड़।
  • खाली रही कुर्सियां: कोरम पूरा न होने से बैठक की गरिमा प्रभावित।
  • प्रशासनिक चुनौती: मेला प्रशासन के लिए अखाड़ों को एक मंच पर लाना अब बड़ी चुनौती।

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