अल्मोड़ा, उत्तराखंड: जहाँ एक ओर बंदरों की समस्या पर केवल बातें होती रहीं और कोई ठोस समाधान नहीं निकला, वहीं एक व्यक्ति संजय पांडे ने इसे जन-समस्या मानकर अकेले ही इस चुनौती का सामना करने का बीड़ा उठाया। अथक परिश्रम और रातों की नींद त्यागकर, उन्होंने इस समस्या का स्थायी हल ढूंढ निकाला है, जिसके परिणामस्वरूप अब शासन की ओर से एक ठोस आदेश भी जारी हो गया है।
यह अनूठा समाधान मॉडल अब पूरे प्रदेश में लागू किया जा सकता है। इस व्यक्ति का मानना है कि यह उपलब्धि उनके दिवंगत माता-पिता के आशीर्वाद और ईश्वर की कृपा से ही संभव हुई है। उन्होंने बताया कि अब तक उन्होंने जितनी भी जन-समस्याएं उठाई हैं या जो भी लोग उनके पास अपनी समस्याएं लेकर आए हैं, उन सभी का उन्होंने निस्वार्थ भाव से स्थायी समाधान कराया है।
उनका कहना है कि उन्हें पद या कुर्सी का कोई मोह नहीं है, बल्कि वे सिर्फ जनसेवा में विश्वास रखते हैं। उनका लक्ष्य केवल जनता के चेहरे पर मुस्कान देखना और उनकी दुआएं प्राप्त करना है। उनका दृढ़ विश्वास है कि “शरीर नश्वर है, पर सेवा अमर होती है।”