हरिद्वार, 12 जुलाई 2025: उत्तराखंड की धामी सरकार द्वारा ‘ऑपरेशन कालनेमि’ के तहत फर्जी बाबाओं की धरपकड़ जारी है। पहले दिन देहरादून में एक बांग्लादेशी सहित 28 और हरिद्वार में 13 फर्जी बाबा गिरफ्तार किए गए। ऑपरेशन के दूसरे दिन हरिद्वार की श्यामपुर कोतवाली पुलिस ने 18 और फर्जी बाबाओं को पकड़ा, जिनमें अधिकांश सपेरा जाति के लोग हैं।
हालांकि, इस ऑपरेशन को लेकर संत समाज में मतभेद उभरकर सामने आए हैं। कुछ संत जहां इसे सरकार का सही कदम बता रहे हैं, वहीं कुछ इसे मात्र ‘लीपापोती’ करार दे रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकार भीख मांगने वालों को गिरफ्तार कर वाहवाही लूट रही है, जबकि असली ‘कालनेमि’ (धोखेबाज) पर हाथ नहीं डाल रही है और न ही उसकी हिम्मत है।
संतों की पहचान का जिम्मा संतों को मिले: स्वामी आनंद स्वरूप
शांभवी पीठाधीश्वर व काली सेना प्रमुख स्वामी आनंद स्वरूप महाराज का कहना है कि यदि सरकार फर्जी बाबाओं पर लगाम कसने के लिए वास्तव में गंभीर है, तो उसे इसके लिए एक कानून बनाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को फर्जी बाबाओं की पहचान का जिम्मा अखाड़ों, मठों और संतों से जुड़ी संस्थाओं को सौंपना चाहिए और इसमें संतों का सहयोग करना चाहिए। उनका तर्क है कि असली और नकली की पहचान संत ही कर सकते हैं, सरकार या पुलिस के पास यह पहचान करने का कोई स्रोत नहीं है। स्वामी आनंद स्वरूप ने यह भी कहा कि उन ‘कालनेमियों’ की पहचान कर उन्हें दंडित किया जाना चाहिए जो बड़े-बड़े मठ बनाकर बैठे हैं और भगवा वस्त्र धारण कर व्यापार में संलिप्त हैं।
सभी आश्रम-अखाड़ों के संतों का सत्यापन हो: श्रीमहंत गोपाल गिरि
श्री शंभू पंचदशनाम आवाह्न अखाड़े के श्रीमहंत गोपाल गिरि महाराज ने भी ‘ऑपरेशन कालनेमि’ पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका कहना है कि यदि सरकार वाकई ‘कालनेमियों’ पर शिकंजा कसने के लिए गंभीर है, तो उसे पहले सभी आश्रम-अखाड़ों की सूची तैयार करनी चाहिए और वहां निवास करने वाले प्रत्येक साधु की जांच करानी चाहिए। जांच में उनके बाबा बनने से पहले से लेकर आज तक की सभी गतिविधियों को शामिल किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि ऐसा करने से बड़ी-बड़ी मछलियां इस जाल में फंसेंगी और तीर्थनगरी एक महीने में ही ‘कालनेमियों’ से मुक्त हो जाएगी। उन्होंने जोर दिया कि कई ऐसे मठाधीश हैं जिनका आपराधिक इतिहास है और वास्तव में वे ही ‘कालनेमि’ हैं, न कि भिक्षा मांगकर गुजारा करने वाले लोग।
अविमुक्तेश्वरानंद, सदानंद, विधुशेखर भारती ‘फर्जी शंकराचार्य’: गोविंदानंद
ज्योतिर्मठ द्वारका शारदा पीठ के ब्रह्मलीन जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के शिष्य दण्डी स्वामी गोविंदानंद सरस्वती ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि श्री शंकराचार्य पद और नाम को लेकर कोर्ट, भक्तों, समाज और प्रशासन को धोखा देने वाले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (वाराणसी, उ.प्र.), सदानंद सरस्वती (झोतेश्वर, नरसिंहपुर जिला, म.प्र.) और विधुशेखर भारती (शृङ्गेरी, कर्नाटक) फर्जी हैं। उन्होंने सरकार से इन पर कार्रवाई करने की मांग की। स्वामी गोविंदानंद सरस्वती ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जहां अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा स्वयं को शंकराचार्य घोषित करने पर रोक लगाई है, वहीं भारत धर्म महामंडल और काशी विद्वत परिषद सहित अनेक प्रमुख संगठनों ने दोनों को शंकराचार्य मानने से इनकार किया है। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे संतों को भी ‘कालनेमि’ की श्रेणी में रखा जाना चाहिए जो न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन करते हैं।

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