हरिद्वार:  उत्तराखंड अधिवक्ता परिषद देवभूमि की दो दिवसीय बैठक में उत्तराखंड हाईकोर्ट नैनीताल के पूर्व न्यायमूर्ति विवेक भारती शर्मा ने न्याय व्यवस्था के सामने चुनौतियों पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हमारे कानून में बहुत जटिलताएं हैं, जो न्याय व्यवस्था के सामने चुनौतियाँ बनी हुई हैं, इसलिए वकीलों को आगे बढ़कर समाधान करना होगा।

प्रेमनगर आश्रम के गोवर्धन हॉल में ‘न्याय व्यवस्था के सामने चुनौती’ विषय पर बोलते हुए पूर्व जस्टिस शर्मा ने कहा कि अंग्रेजों ने कानून अपनी सत्ता को मजबूत करने के लिए बनाया था, जिसमें भारत का हित गौण था। आजादी के बाद भी वही कानून व्यवस्था चलती रही। उन्होंने जोर दिया कि न्यायपालिका, विधायिका और अधिवक्ताओं को भूत, वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों पर विचार करना चाहिए, ताकि निष्पक्ष न्याय व्यवस्था के उद्देश्य को प्राप्त किया जा सके।

​उन्होंने बताया कि न्याय व्यवस्था के सुधार में कमी है, जिससे न्याय मिलने की गति धीमी है। उन्होंने अधिवक्ताओं से आग्रह किया कि वे वादकारी को शीघ्र न्याय दिलाने के लिए केस पर चर्चा करें, क्योंकि चर्चा न होने से सही बात जज के सामने नहीं आ पाती। उन्होंने 19 वर्ष के वकालत और 20 वर्ष के न्यायिक अधिकारी के अनुभव के आधार पर कहा कि न्याय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए केस की पेंडेंसी खत्म करने, जजों की कमी पूरी करने और समुचित संसाधन की आवश्यकता है।

अन्य महत्वपूर्ण घटनाएँ:

  • जन केंद्रित न्याय वितरण प्रणाली विषय पर दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रोफ़ेसर सीमा सिंह ने बताया कि अधिवक्ता परिषद के प्रयासों से प्राचीन कानून पुस्तक ज्यूरिस प्रूडेंस को दिल्ली यूनिवर्सिटी के पाठ्यक्रम में शामिल कर लिया गया है।
  • ​राष्ट्रीय मंत्री चरण सिंह ने अधिवक्ता परिषद के कानूनी क्षेत्र में सुधार और देश हित के मुद्दों पर मार्गदर्शन करने के प्रयासों पर प्रकाश डाला।
  • ​बैठक की अध्यक्षता दिनेश सिंह पंवार ने की और मंच संचालन यूपी व उत्तराखंड प्रदेश संयोजक विपिन कुमार ने किया।
  • ​वर्तमान कार्यकारिणी को भंग कर नई कार्यकारिणी की घोषणा की गई, जिसमें जानकी सूर्या (प्रदेशाध्यक्षा), अनुज कुमार शर्मा (प्रदेश महामंत्री) और संदीप टंडन (कोषाध्यक्ष) शामिल हैं।

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