व्यक्तित्व विकास से मिलती है जीवन में सफलता: शांतिकुंज में कन्या कौशल प्रशिक्षण शिविर

हरिद्वार: गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में चल रहे कन्या कौशल प्रशिक्षण शिविर के दूसरे दिन वक्ताओं ने प्रतिभागियों को जीवन में सफलता और व्यक्तित्व विकास के सूत्र सिखाए। उन्होंने ज़ोर दिया कि जीवन का उद्देश्य केवल बड़ा आदमी बनना नहीं, बल्कि संवेदनशील, संस्कारित और चरित्रवान व्यक्तित्व बनना होना चाहिए। शांतिकुंज की अधिष्ठात्री श्रद्धेया शैलदीदी ने प्रतिभागियों को सकारात्मक सोच, नियमित दिनचर्या और आत्म-अनुशासन से हर लक्ष्य प्राप्त करने के उपाय बताए। देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने विद्यार्थीकाल को स्वर्णिम अवसर बताते हुए स्वामी विवेकानंद और पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के जीवन से प्रेरणा लेने को कहा। प्रतिभागियों को शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विकास से संबंधित प्रशिक्षण दिया गया, साथ ही आधुनिक चुनौतियों को देखते हुए साइबर क्राइम जागरूकता पर एक वीडियो भी दिखाया गया। शिविर में राजस्थान से आईं तीन सौ से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
वर्ल्ड स्ट्रोक डे: मैक्स हॉस्पिटल, देहरादून ने स्ट्रोक की रोकथाम पर ज़ोर दियाद

देहरादून। वर्ल्ड स्ट्रोक डे (29 अक्टूबर) के अवसर पर, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून, ने स्ट्रोक से लड़ने में रोकथाम और समय पर इलाज के महत्व पर जागरूकता बढ़ाई। इस साल की थीम ‘रोकथाम की शक्ति: अपने दिमाग की रक्षा करें’ पर ज़ोर दिया गया। न्यूरोलॉजी विभाग के डायरेक्टर, डॉ. शमशेर द्विवेदी ने कहा कि स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है और दिमाग को बचाने के लिए चेतावनी के संकेतों (B FAST: बैलेंस बिगड़ना, आंखों में बदलाव, चेहरा लटकना, बांह में कमज़ोरी, बोलने में दिक्कत) को पहचानना और तुरंत एक्शन लेना महत्वपूर्ण है। सीनियर कंसल्टेंट, डॉ. नितिन गर्ग ने बताया कि लाइफस्टाइल में बदलाव सबसे मजबूत बचाव है। लगभग 90% स्ट्रोक को स्वस्थ आदतों और जोखिम कारकों जैसे हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और धूम्रपान को नियंत्रित करके रोका जा सकता है। हॉस्पिटल समुदाय में जागरूकता बढ़ाना जारी रखे हुए है।
चमनलाल महाविद्यालय में दो हज़ार किताबों का निःशुल्क वितरण
हरिद्वार: चमनलाल स्वायत्त महाविद्यालय में उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय पुस्तक प्रदर्शनी और निःशुल्क वितरण कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को लगभग 2,000 किताबें वितरित की गईं। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुशील उपाध्याय ने बताया कि ये अतिरिक्त पुस्तकें मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा विगत वर्षों में उपलब्ध कराई गई थीं। 50 से अधिक विषयों की स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध स्तर की पुस्तकें छात्र-छात्राओं को निशुल्क दी गईं, जिन्हें अधिकतम 10 किताबें लेने की अनुमति थी। महाविद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष रामकुमार शर्मा ने इस पहल को अब एक वार्षिक गतिविधि बनाने की घोषणा की और लोगों से घर में उपलब्ध अतिरिक्त पुस्तकें महाविद्यालय को उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। सचिव अरुण हरित ने छात्रों से इन पुस्तकों को पढ़ने के बाद जरूरतमंद साथियों को देने का आग्रह किया, ताकि ज्ञान की निधि अधिक युवाओं तक पहुँच सके। इस कार्यक्रम का संयोजन आईक्यूएसी की निदेशक डॉ. दीपक अग्रवाल और मुक्त विश्वविद्यालय के केंद्र समन्वयक डॉ. अनुराग शर्मा ने किया।