तीसरे दिन कथाव्यास ने कराया भीष्म जन्म से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का श्रवण
हरिद्वार। श्रीअखंड परशुराम अखाड़े के संयोजन में जिला कारागार में आयोजित गंगा कथा के तीसरे दिन कथाव्यास आचार्य कृष्ण शास्त्री ने देवी गंगा के राजा शांतनु से विवाह, वसुओं द्वारा वशिष्ठ ऋषि की नंदिनी गाय चुराने पर मिले श्राप,आठ वसुओं को श्राप से मुक्त करने, देवी गंगा द्वारा सात पुत्रों को जन्म लेते ही जल में प्रवाहित करने,आठवें पुत्र देवव्रत को जीवित रखकर उनके भीष्म बनने की कथा,भीष्म द्वारा आजीवन ब्रह्मचर्य और राज्य त्याग की भीषण प्रतिज्ञा आदि विभिन्न प्रसंगों का श्रवण कराया।श्रीअखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि श्रावण मास में मां गंगा की अमृत कथा के श्रवण से कारागार में निरूद्ध बंदियों की मानसिकता पर सकारात्मक असर होगा ओर वे अपराध का मार्ग छोड़कर समाज और देश की उन्नति में योगदान मुख्य अतिथि निरंजनी अखाड़े के सचिव स्वामी रामरतन गिरि महाराज ने कहा कि मां गंगा की कथा सुनने से समस्त पाप नष्ट होते हैं।कथा और सत्संग ही मानव को सही मार्ग दिखाते हैं।आज के युग में धर्म से जुड़कर ही समाज का कल्याण संभव है।स्वामी रविदेव शास्त्री ने कहा कि गंगा केवल नदी नहीं, मोक्षदायिनी हैं।गंगा तट पर कथा श्रवण करने से शांति और सद्बुद्धि प्राप्त होती है।कथा के यजमान जलज कौशिक,सत्यम शर्मा,स्वामी ज्योतिर्मयानंद,स्वामी रूद्रानंद सरस्वती,बृजमोहन शर्मा,बंटी कुमार,चौधरी बलविंदर, पंडित कृष्ण शर्मा और अमित कुमार मौजूद रहे।
