कुमाऊं में स्कूलों की सुधरेगी व्यवस्था, पारदर्शिता से मिलेंगे आरटीई दाखिले
आयुक्त/सचिव मुख्यमंत्री दीपक रावत ने कुमाऊं मंडल के माध्यमिक शिक्षा विभाग की समीक्षा की। उन्होंने स्कूलों में आधारभूत सुविधाएं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और योजनाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए।आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के तहत गरीब बच्चों के दाखिले में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए आय प्रमाण पत्र और आईटीआर (ITR) की गहन जांच करने को कहा गया है।बड़ी उपलब्धि: परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स 2.0 की रिपोर्ट में उत्तराखंड ने शिक्षा के क्षेत्र में लंबी छलांग लगाई है, जिससे राज्य का स्थान 24वें से सुधरकर 15वां हो गया है।मंडल में वर्तमान में 1107 सरकारी स्कूल (424 हाईस्कूल और 683 इंटर), 41 अटल उत्कृष्ट विद्यालय और 94 पीएमश्री स्कूल संचालित हो रहे हैं।
देहरादून में विशेष गहन पुनरीक्षण-2026: 98% से अधिक मतदाता प्रपत्र वितरित
स्थान: देहरादून
जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की।जनपद के कुल 13,76,813 मतदाताओं में से 98.22% (13.52 लाख से अधिक) को गणना प्रपत्र बांटे जा चुके हैं। मसूरी विधानसभा में सबसे ज्यादा 99.83% और चकराता में 99.46% वितरण हुआ है।2.06 लाख से अधिक मतदाताओं का डिजिटलाइजेशन पूरा हो चुका है। अभियान में 1,881 बीएलओ (BLO) जुटे हैं।महत्वपूर्ण तिथियां: 14 जुलाई को प्रारूप निर्वाचक नामावली प्रकाशित होगी और 15 सितंबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी।किसी भी शिकायत या जानकारी के लिए कंट्रोल रूम नंबर 0135-1950, 0135-2726066 और मोबाइल 8273702146 जारी किया गया है।
अर्द्धकुंभ-2027 की तैयारियों को लेकर ऋषिकेश में विकास कार्यों की समीक्षा
स्थान: देहरादून/ऋषिकेश जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में हुई जिला गंगा समिति की बैठक में आगामी अर्द्धकुंभ मेला-2027 की स्थायी और अस्थायी निर्माण परियोजनाओं की समीक्षा की गई।नगर निगम ऋषिकेश ने अर्द्धकुंभ के लिए लगभग 156 करोड़ रुपये के प्रस्तावित कार्यों का खाका पेश किया।बैठक में त्रिवेणी घाट के पुनर्विकास, चंद्रभागा पैदल पुल की सुरक्षा व सौंदर्यीकरण, आस्था पथ के विकास और मां सरस्वती मंदिर क्षेत्र के जीर्णोद्धार पर विस्तृत चर्चा हुई।इसके अलावा ऋषिकेश, मुनिकीरेती, तपोवन और स्वर्गाश्रम क्षेत्रों में पेयजल, सीवरेज, स्ट्रीट लाइटिंग और इलेक्ट्रिक बस अवसंरचना जैसी शहरी सुविधाओं को बेहतर करने के लिए चल रही परियोजनाओं (केएफडब्ल्यू वित्तपोषित) की डीपीआर और टेंडर प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए।