94.98 प्रतिशत रहा विद्यालय का परीक्षा परिणाम
हरिद्वार। भेल सेक्टर-2 स्थित सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज का कक्षा 6 से 9 तथा कक्षा 11 का वार्षिक परीक्षा परिणाम शुक्रवार को घोषित किया गया।वरिष्ठ शिक्षक तारादत्त जोशी ने परीक्षा परिणाम की घोषणा करते हुए बताया कि कथा 8की छात्रा हर्षिता पंत ने 95.45 प्रतिशत अंक लाकर अपनी कक्षा और बाल वर्ग (कक्षा 6 से कक्षा 8)में प्रथम स्थान प्राप्त किया।कक्षा 9 की छात्रा कशिश शर्मा व कक्षा 11के छात्र सार्थक कुमार ने 96.6 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान प्राप्त किया।कक्षा 7 में हार्दिक तिवारी ने 93.6 फीसदी एवं किशोर वर्ग (कक्षा 11) में अंश अग्रवाल ने 90.3प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान प्राप्त किया।तारादत्त जोशी ने बताया कि सत्र 2025-26 में कक्षा 6 से 9एवम कक्षा 11 के 1177 छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल हुए थे।जिनमें से 1118परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए हैं।विद्यालय का परीक्षाफल 94.98प्रतिशत रहा। विद्यालय की प्रबंध समिति की ओर से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया।इसके अतिरिक्त कक्षा में प्रमुख स्थान प्राप्त करने वाले एवं संस्कृति ज्ञान परीक्षा, खेलकूद प्रतियोगिता तथा शत प्रतिशत उपस्थिति,सुलेख प्रतियोगिता एवम बस्ता प्रतियोगिता में प्रथम आने वाले छात्र-छात्राओं को भी पुरस्कृत किया गया।विद्या भारती एवं भारतीय शिक्षा समिति के मंत्री रजनीकांत शुक्ल,विद्यालय के अध्यक्ष डा.शिवशंकर जायसवाल,सेवा भारती उत्तराखंड के संरक्षक महेशचंद काला,प्रांतीय प्रतिनिधि दीपक सिंघल,सरस्वती शिशु मंदिर रानीपुर के प्रधानाचार्य कमल रावत,सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज भेल सेक्टर-2 के प्रधानाचार्य लोकेंद्र दत्त अंथवाल ने मां शारदे एवं पवित्र पावन ओम के समक्ष दीप प्रज्वलन कर परीक्षा परिणाम घोषित करने के लिए आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ किया।रजनीकांत शुक्ल ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि मेहनत का कोई शॉर्टकट नहीं है।यदि हमें जीवन में आगे बढ़ना है तो लगातार मेहनत करें।उन्होंने कहा कि बच्चों का मनोबल बढ़ाने के लिए अभिभावक बच्चांे की प्रशंसा करें।डा.शिवशंकर जायसवाल ने छात्र-छात्राओं को आशीर्वाद और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अपने परीक्षा परिणाम का आंकलन करें। जिनके अंक कम आये हैं वे निराश न हो बल्कि आगे और मेहनत करें।शिक्षक भी परीक्षा परिणाम का आंकलन करें कि अगले सत्र में परिणाम और अधिक अच्छा कैसे हो सकता है।उन्होंने कहा कि आज के दौर में मोबाइल फोन की उपयोगिता प्रत्येक क्षेत्र में बढ़ गयी है।शिक्षा के क्षेत्र में इसकी उपयोगिता है।अभिभावक अपने बच्चों को मोबाइल का उचित प्रयोग करना भी सिखाएं।दीपक सिंघल ने कहा कि बच्चों की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका उनके माता पिता की होती है।माता पिता जैसा व्यवहार अपनाते हैं बच्चा वैसा ही बनेगा।इसलिए माता पिता भी बच्चो के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षकों के साथ मिलकर कार्य करें।विद्यालय के प्रधानाचार्य लोकेंद्रदत्त अंथवाल ने कहा कि परीक्षाएं जीवन भर चलती रहती है।छात्रों को अपने परिणाम से निराश होने के बजाए अगले सत्र में और बेहतर करने की प्रेरणा लेनी चाहिए।