हरिद्वार: नगर निगम के बहुचर्चित 38 बीघा जमीन खरीद मामले में जांच की आंच तेज हो गई है। गन्ना एवं चीनी विभाग के सचिव और इस मामले की जांच समिति के प्रभारी रणवीर सिंह चौहान ने मंगलवार को हरिद्वार पहुंचकर विवादित भूमि का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने नगर निगम, राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन के आला अधिकारियों के साथ सराय क्षेत्र स्थित मौके पर पहुंचकर जमीन की वर्तमान स्थिति, सीमांकन और जमीन के सौदे की असलियत का जायजा लिया।
जांच अधिकारी चौहान ने स्थानीय नागरिकों और आसपास के जमीन मालिकों से भी विस्तृत बातचीत की और उनके बयान दर्ज किए। उन्होंने मौके से ही महत्वपूर्ण दस्तावेजी साक्ष्य भी जुटाए, जो इस पूरे प्रकरण की जांच में अहम साबित हो सकते हैं।
इसके बाद, जांच अधिकारी रणवीर सिंह चौहान ने नगर निगम कार्यालय पहुंचकर वहां के अधिकारियों और कर्मचारियों से सिलसिलेवार पूछताछ की। उन्होंने इस जमीन खरीद से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर सवाल-जवाब किए और उनके बयान कलमबद्ध किए।
गौरतलब है कि यह पूरा मामला वर्ष 2024 का है, जब तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी के कार्यकाल में शहर के कूड़े को डंप करने के लिए 38 बीघा जमीन 52 करोड़ रुपए में खरीदी गई थी। इस जमीन की खरीद प्रक्रिया में उस समय सवाल तब उठने लगे थे, जब यह तथ्य सामने आया कि नगर निगम द्वारा जमीन खरीदने से ठीक पहले, भूमि के मालिक जितेंद्र, सुमन और धर्मपाल ने इस कृषि भूमि को धारा 143 के तहत व्यवसायिक भूमि में परिवर्तित करा लिया था। हैरानी की बात यह थी कि तत्कालीन उप जिलाधिकारी (एसडीएम) अजय वीर सिंह ने यह पूरी प्रक्रिया महज एक सप्ताह के भीतर ही पूर्ण कर दी थी।
इस संदिग्ध भूमि सौदे को लेकर हरिद्वार की महापौर किरण जैसल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शिकायत की थी, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए थे। शुरुआती जांच में अनियमितताएं पाए जाने पर नगर निगम के चार अधिकारियों – सहायक नगर आयुक्त रविंद्र कुमार दयाल, प्रभारी अधिशासी अभियंता आनंद सिंह मिश्रवान, कर एवं राजस्व अधीक्षक लक्ष्मीकांत भट्ट और अवर अभियंता दिनेश कंडवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था। इसके अतिरिक्त, सेवा विस्तार पर कार्यरत लिपिक वेदपाल की सेवाएं भी समाप्त कर दी गई थीं। जांच एजेंसी ने जमीन के विक्रेताओं के बैंक खातों को भी फ्रीज कर दिया था, ताकि किसी भी तरह के वित्तीय लेनदेन को रोका जा सके।
फिलहाल, इस पूरे मामले की गहन जांच जारी है और नगर निगम के विभिन्न अधिकारियों व अन्य संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की जा रही है। जांच अधिकारी रणवीर सिंह चौहान ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि इस प्रकरण की जांच में हर छोटे-बड़े पहलू और बिंदु को शामिल किया जा रहा है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि जल्द से जल्द निष्पक्ष जांच पूरी कर इसकी रिपोर्ट शासन को सौंप दी जाएगी। इस मामले में आगे क्या खुलासे होते हैं, इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।