हरिद्वार: खडखड़ी स्थित श्रीगंगा भक्ति आश्रम के परमाध्यक्ष, संत ज्ञानमूर्ति श्री महंत कमलेशानंद सरस्वती ने अपने प्रवचन में कहा कि कलियुग में अच्छे कर्मों की आशा करना व्यर्थ है। उन्होंने कहा कि यदि लोग आपके लिए गड्ढे खोद रहे हैं, तो आप उनमें पौधे लगाएं और उनके फलों का आनंद लें। उन्होंने कहा कि इस कलियुग में, हर कोई “जैसे को तैसा” चाहता है, लेकिन किसी की जुबान बोलती है, तो किसी की नियत, और किसी का समय। उन्होंने कहा कि जीवन के अंत में, ईश्वर के दरबार में हर कर्म बोलता है।
श्री महंत कमलेशानंद सरस्वती ने कहा कि मनुष्य का कर्तव्य ही उसका धर्म है, और दूसरों के प्रति प्रेम और सद्भावना ही ईश्वर है। उन्होंने कहा कि सेवा ही पूजा है, और सत्य ही भक्ति है। उन्होंने कहा कि जो मनुष्य इन बातों का ध्यान रखता है, उसका जीवन सार्थक हो जाता है, और वह कलियुग के प्रभाव से बचा रहता है। उन्होंने कहा कि राम भक्ति वह नैया है जो हमें भवसागर पार कराएगी, और सत्य ही वह मार्ग है जो हमें हरि से मिलाएगा।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार एक व्यापारी लालच में सामान में मिलावट करता है, उसी प्रकार झूठ और लालच मनुष्य को अच्छे कर्मों से दूर करते हैं।

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