देहरादून:
उत्तराखंड की राजनीति में साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा अभी से चढ़ने लगा है। राज्य में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बीच चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा घोषित भाजपा के ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान ने राज्य के राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।
अभियान की पृष्ठभूमि और कारण
हाल ही में एसआईआर (SIR) / वोटर लिस्ट विवाद और कांग्रेस पार्टी द्वारा राज्य में किए जा रहे विभिन्न विरोध प्रदर्शनों के बाद, सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला था। इसी राजनीतिक खींचतान के जवाब में भाजपा ने राज्यभर में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान चलाने का ऐलान किया है, जिसके जरिए पार्टी जनता के बीच जाकर विपक्षी दलों के रुख का मुकाबला करेगी।
अभियान का कार्यक्रम और चरण
इस बड़े राजनीतिक अभियान को दो चरणों में विभाजित किया गया है, जो इस प्रकार हैं:
- पहला चरण: 22 अक्टूबर से 5 नवंबर तक
- दूसरा चरण: 11 नवंबर से 30 नवंबर तक
प्रमुख कार्यक्रम और रूपरेखा
- पदयात्राएं और जनसंवाद: इस अभियान के तहत उत्तराखंड के सभी 13 जिलों में पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा पदयात्राएं निकाली जाएंगी और व्यापक स्तर पर जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।श्रीनगर गढ़वाल का बड़ा कार्यक्रम: इस अभियान के तहत 31 अक्टूबर को श्रीनगर गढ़वाल में एक बहुत बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया जाना तय किया गया है, जहां पार्टी के बड़े नेता जुटेंगे और शक्ति प्रदर्शन करेंगे।
उत्तराखंड की बदलती राजनीतिक तस्वीर (2027 चुनाव की आहट)
इन तमाम राजनीतिक गतिविधियों और हालिया घटनाक्रमों से यह पूरी तरह साफ हो चुका है कि उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए राजनीतिक दलों ने अपनी कमर कस ली है और तैयारियां जोरों पर हैं:
- भारतीय जनता पार्टी (BJP) की रणनीति: भाजपा आक्रामक रुख अपनाते हुए मुख्य रूप से स्थानीय पहचान, उत्तराखंड राज्य आंदोलन की विरासत और ‘लोकतंत्र’ के मुद्दों को केंद्र में रखकर आगे बढ़ रही है।कांग्रेस का विपक्षी एजेंडा: दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी लगातार बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, महिला सुरक्षा और सरकार की नीतियों व उपलब्धियों पर सवाल खड़े कर एक मजबूत विपक्षी एजेंडा तैयार करने में जुटी है।
आने वाले दिनों में दोनों प्रमुख दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी और जन-संपर्क अभियानों के और अधिक तेज होने के पूरे आसार हैं।

